सनातन धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है. सभी धर्म कर्म में पहले गणपति की पूजा की परम्परा है. गणेश जी विघ्नेश्वर हैं इसलिए कार्य की सफलता के लिए इनकी पूजा की जाती है. धर्म ग्रन्थों में कहा गया है कि जो व्यक्ति प्रत्येक दिन भगवान गणेश की उपासना करता है उनके सभी विघ्न खत्म हो जाते हैं और उन्हें सभी प्रकार की सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होती है. हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी गणेश की उपासना के लिए बनाई गई है. चतुर्थी व्रत को हिन्दू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. सभी पांच प्रमुख वैदिक देवताओं को समर्पित तिथियाँ महत्वपूर्ण हैं. गणपति की उपासना का सम्प्रदाय गाणपत्य सम्प्रदाय है. इस वर्ष अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को आज 6 अक्तूबर को विनायक चतुर्थी व्रत रखा जाएगा.
विनायक चतुर्थी मुहूर्त –
आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 06 अक्टूबर को सुबह 07 बजकर 49 मिटन पर शुरू हो रही है. इस तिथि का समापन 07 अक्टूबर को सुबह 09 बजकर 47 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, आश्विन माह की विनायक चतुर्थी का व्रत रविवार, 06 अक्टूबर को मनाई जाएगी. इस दिन रवि योग सुबह में 6 बजकर 17 मिनट से शरु है. जो पूरे दिन रहेगा. रवि योग का समापन देर रात 12 बजकर 11 मिनट पर होगा.
6 अक्टूबर को विनायक चतुर्थी की पूजा के लिए लगभग ढाई घंटे का मुहूर्त है. गणेश जी की पूजा का शुभ समय सुबह 10 बजकर 58 मिनट से प्रारंभ हो रहा है, जो दोपहर 1 बजकर 19 मिनट तक रहेगा. इस मुहूर्त में विनायक चतुर्थी की पूजा संपन्न कर लेना श्रेष्ठ है.
गणेश जी पूजा उनकी गायत्री से करना अत्यंत फलप्रद होता है –
ॐ लम्बोदराय विद्महे महोदराय धीमहि ।
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥ (अग्निपुराण)
ॐ महोत्कटाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि ।
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥ (अग्निपुराण)
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि ।
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥ (गणपत्यथर्वशीर्ष)
ॐ तत्कराटाय विद्महे हस्तिमुखाय धीमहि ।
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥ (मैत्रायणीय-संहिता)
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि ।
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥ (तैत्तिरीयारण्यक-नारायणोपनिषद्)
इन गायत्री मन्त्रो में किसी भी मन्त्र से पूजा सम्पन्न की जा सकती है.

