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हर माह में पड़ने वाली अमावस्या तिथि विशेष होती है. अमावस्या पितरों की तिथि है इसलिए इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए मासिक श्राद्ध और तर्पण किया जाता है. हर अमावस्या तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व होता है लेकिन कुछ विशेष अमावस्या तिथियों पर यह बड़े स्तर पर पर्व के रूप में मनाया जाता है. वैदिक हिंदू धर्म में अमावस्या का बहुत अधिक महत्व होता है. अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है. इस दिन नदी या सरोवर में स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य देकर पितरों का तर्पण करना चाहिए. पितृ पूजा सबसे प्राचीन है, जब भगवान की निश्चित अवधारणा का विकास नहीं हुआ था. श्री राम इत्यादि पितर ही हैं जिनकी वैष्णवों में अवतार रूप में मान्यता है. वैष्णव मूलभूत रूप से पितृपूजक हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए भी व्रत रखती हैं विशेष रूप से सोमवती अमावस्या तो प्रसिद्ध ही है. वैशाख अमावस्या पर पीपल के पेड़ पर सुबह जल चढ़ाना चाहिए और शाम को दीपक जलाएं. इस दिन जरूरतमंद लोगों को अन्न का दान करने से बड़ा पुण्य मिलता है.

अमावस्या मुहूर्त-

पंचांग के अनुसार वैशाख माह की अमावस्या तिथि 7 मई की सुबह 11 बजकर 41 पर शुरू होगी. इस तिथि का समापन 8 मई की सुबह 8 बजकर 52 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार वैशाख अमावस्या बुधवार 8 मई 2024 को मनाई जाएगी. इस दिन पितरो का नक्षत्र रहेगा इसलिए यह अमावस्या काफी फलप्रद है.

वैशाख अमावस्या के दिन स्नान-दान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है. पितर ऋषि भी हैं इसलिए उनके लिए भी तर्पण इत्यादि करना कर्तव्य है. अमावस्या के दिन पितरों का पूजन करना चाहिए और शास्त्रों के अनुसार ही तिलादि का प्रयोग करना चाहिए. श्राद्ध और तर्पण के विशेष नियम हैं, उन्हें जाने बगैर मनमाने ढंग से तर्पण-पूजन इत्यादि करने से पितर नाराज होते हैं. शास्त्र के अनुसार श्राद्ध और तर्पण दोपहर के बाद ही करना चाहिए, यह सवन ही पितरों के लिए प्रशस्त है.