कार्तिक का शुभ महीना चल रहा है. सम्पूर्ण कार्तिक महीना विष्णु भगवान को समर्पित है. कार्तिक नवमी से एकादशी तक की तिथि अति पुण्यदायी कही गई है. इस बीच 21 नवम्बर अक्षय नवमी, 23 नवम्बर देवोत्थान एकादशी, 24 नवम्बर तुलसी विवाह, 25 नवम्बर बैकुंठ चतुर्दशी, 26 नवम्बर देव दीवाली और 27 नवम्बर कार्तिक पूर्णिमा पड़ेगा, इसी के साथ पर्वों से भरा यह महीना खत्म हो जायेगा और मार्गशीर्ष मास प्रारम्भ हो जायेगा. शास्त्रों के अनुसार कार्तिक नवमी को ही सतयुग का प्रारम्भ हुआ था इसलिए इसे सत्ययुगादी कहा जाता है. कार्तिक नवमी को अक्षय नवमी भी कहते हैं.
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और दान देने से बैकुंठ की प्राप्ति होती है. वैसे तो तुलसी विवाह एकादशी के बाद है परन्तु शास्त्रों में एकादशी की संध्या में तुलसी विवाह के लिए कहा गया है. तुलसी विवाह से कन्यादान का फल प्राप्त होता है. तुलसी विवाह करने से वैधव्यता का दोष भी निवृत्त होता है इसलिए तुलसी पूजन अति शुभ कहा गया है.
कार्तिक नवमी के दिन उपवास करके भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित कर विधिवत पूजन और दीपदान करने से समस्त कामनाये पूर्ण होती हैं और उपासक को संसार के सभी सुख प्राप्त होते हैं. नवमी के दिन विष्णु प्रतिमा के दान से वैष्णव यज्ञ का फल प्राप्त होता है. अक्षय नवमी को आंवला नवमी भी कहा जाता है इसदिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने से गरीबी दूर होती है और आर्थिक सम्पन्नता आती है. आवंले के पेड़ को हल्दी, कुमकुम, अक्षत, फूल चढ़ाएं. इसके बाद जल और कच्चा दूध चढ़ाएं. भगवान विष्णु को पूजन में आंवला जरूर अर्पित करें. फिर आंवले की परिक्रमा लगाते हुए कच्चा सूत या मौली को आठ बार लपेटे. पूजा के बाद कथा वाचन करें. पूजा की समाप्ति पर परिवार के साथ आवंला वृक्ष के नीचे भोजन करने से दीर्घायु की प्राप्ति होती है.
इस दिन महर्षि च्यवन ने आंवले का सेवन किया था, जिससे उन्हें फिर से यौवन मिला था. मान्यता है कि सृष्टि निर्माण के लिए ब्रह्मा जी के आंसुओं से आंवला पेड़ उत्पन्न हुआ था और इसे पृथ्वी का पहला फल माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु का वास आंवले में होता है इसलिए आंवले की पूजा से विष्णुपूजन का पूर्ण फल मिलता है. इस दिन आंवले का सेवन अवश्य करना चाहिए. आंवला वृक्ष साक्षात विष्णु का ही स्वरूप है इसके स्मरण से ही गोदान के बराबर फल मिलता है. इस दिन आंवले के बीज को हरे कपड़े में बांधकर अपने पास रखने से आर्थिक लाभ होता है. इसको पोटली में बांध कर तिजोरी या धन के स्थान पर रखने से धन का आगमन होता है.
मुहूर्त-
कार्तिक नवमी के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 21 नवंबर, 2023 को प्रातः 03 बजकर 16 मिनट पर प्रारम्भ हो रही है. इसका समापन 22 नवंबर को रात्रि 01 बजकर 09 मिनट पर होगा. ऐसे में अक्षय नवमी 21 नवंबर, मंगलवार के दिन मनाई जाएगी.

