अयोध्या राम मन्दिर में हो रही प्राण प्रतिष्ठा का जिस तरह विरोध हुआ है और वह भी हिन्दू धर्म के सबसे बड़े गुरुओं द्वारा वह एक महत्वपूर्ण सन्दर्भ है. धर्म गुरु बृहस्पति का प्रतिनिधि होता है. राम मन्दिर की प्राण प्रतिष्ठा का अशास्त्रीय होना, इसका मुहूर्तविहीन होना और इसका सिरविहीन बिल्डिंग में राजनीतिक लाभ के लिए किया जाना यह सिद्ध करता है कि मन्दिर पर राहु-केतु का अधिपत्य हो गया है. मन्दिर सदैव सभी अंगों के साथ ही शास्त्रों में मन्दिर कहा जाता है, वर्तमान में यह अभी मन्दिर नहीं है. यह एक अधूरी बिल्डिंग है जिसका सिर नहीं है.
एक सिरविहीन मन्दिर में प्रतिष्ठा राहु-केतु के प्रभाव को स्पष्ट रूप से सामने रखता है. (Ram temple has been fully eclipsed by Rahu-Ketu) मन्दिर पर राहु-केतु के प्रभाव को चम्पत राय के वीडियों से भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है जिसमे वह मन्दिर में लूटपाट की बात कर रहा है. किसी चीज पर राहु-केतु प्रभाव का आंकलन इन्हीं चीजों से किया जाता है. किसी व्यक्ति पर राहु-केतु का अशुभ प्रभाव निम्नलिखित सिम्पटम से जाना जाता है –
1- राहु-केतु के प्रभाव में व्यक्ति अधर्मी, शास्त्रविहीन, विधिविहीन और स्वेछाचारी होता है
2-राहु-केतु भ्रष्टाचार और अधर्म को बढ़ावा देते हैं और कोई नियम-कानून नहीं मानते .
3-राहु-केतु झूठ और दुष्प्रचार के सबसे बड़े ग्रह हैं. ये दुष्प्रचार द्वारा जनता और देश का नाश करते हैं.
4-राहु-केतु कोई नैतिक मूल्य, इथिक्स को नहीं मानते इसलिए बलात्कार, लूटपाट, आगजनी को बढ़ावा और समर्थन देते हैं.
5-राहु-केतु के प्रभाव में मिथ्याचार पनपता है, यह अधर्म फ़ैलाने के लिए कालनेमि उत्पन करता है जिसका रामायण में हनुमान ने वध किया था.
यह सभी बातें मन्दिर प्राण प्रतिष्ठा में शरीक लोगों पर लागू होती हैं. इसमें यह बात स्वयं जोड़ लेनी चाहिए कि ऐसे गहरे अशुभ प्रभाव में होने से यह कल्याणकारी नहीं है. जो कोई भी इसका किसी प्रकार से समर्थन करता है उसका देर सबेर अहित अवश्य होगा.

