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 सूर्य का मकर में गोचर से पहले धनु राशि में होगी पौष माह की अमावस्या. इस अमावस्या के दिन सूर्य-बुध-मंगल और चन्द्र धनु राशि में स्थित रहेंगे. अमावस्या तिथि पितरों के लिए समर्पित है इसलिए साल की पहली अमावस्या पर पितृ पूजन और तर्पण करना बहुत लाभदायक हो सकता है. पितृ दोष लगने पर कई तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है, ऐसे में आप पौष माह की इस अमावस्या पर पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं. पौष मास की अमावस्या को ‘छोटा श्राद्ध पक्ष’ भी कहा जाता है.

आप पौष अमावस्या के दिन कुछ उपायों द्वारा पितृ दोष से मुक्ति पा सकते हैं. इस दिन पूर्वजों के निमित्त तर्पण, पिंडदान, पवित्र नदी में स्नान व अर्घ्य देना चाहिए या किसी आचार्य से करवाना चाहिए. इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है. इस दिन पौष महीने की अमावस्या का दान आदि करना भी बहुत-ही शुभ माना जाता है.

मुहूर्त –

पौष माह की अमावस्या तिथि 10 जनवरी, 2024 को रात 08 बजकर 10 मिनट पर शुरू हो रही है. पूर्ण अमावस्या का समय 11 जनवरी को शाम 05 बजकर 26 मिनट पर रहेगा. ऐसे में साल 2024 की पौष अमावस्या 11 जनवरी, गुरुवार के दिन रहेगी. अमावस्या में पितृ कर्म का श्रेष्ठ समय दोपहर के बाद का लेना चाहिए.

पौष अमावस्या को आमजन ये करें –

1-पीपल के पेड़ में पितरों का वास माना गया है इसलिए आम जन जिन्हें पितृकर्म नहीं करना है वे पौष अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करें और जल अर्पित करें. ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. पौष अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त अपनी क्षमता के अनुसार, जरूरतमंदों में चावल, दूध, गर्म कपड़े बांटे और उन्हें भरपेट भोजन कराएं तो अति उत्तम.

2-अमावस्या के दिन शनि का विशेष पूजन करना चाहिए. एक दिन का अनुष्ठान करना चाहिए इससे इस युग में सबसे प्रभावशाली ग्रह की कृपा प्राप्त होगी और जीवन में कोई बाधा नहीं आएगी. हर तरफ से सफलता मिलेगी.

3-अमावस्या को काली की तांत्रिक पूजा के लिए प्रशस्त माना गया है. ऐसे में काली पूजा और उनके मन्त्रों का जप करने से देवी की कृपा प्राप्त होती है. काली के सिद्ध स्तोत्र का पाठ भी लाभप्रद होता है.