राममन्दिर के राजनीतिक उद्घाटन की तय तिथि 22 जनवरी में सिर्फ एकदिन बच गये है. इस बीच धर्म जगत में नये डेवलपमेंट हुए हैं. धर्म गुरुओं और सम्प्रदाय के आचार्यों, संतों और कथाकारों को भी एक बात स्पष्ट होती जा रही है कि आरएसएस-विहिप-भाजपा एक राजनीतिक पार्टी हैं लेकिन ये न केवल धर्म में हस्तक्षेप कर रहे हैं बल्कि धर्म स्थलों पर कब्जा भी करने लगे हैं. आरएसएस एक परम्पराविहीन, अधर्मी, फासिस्ट संगठन है लेकिन खुद एक सम्प्रदाय के रूप में पेश कर रहा है जिसका परिणाम अधूरे बने मन्दिर में अशास्त्रविहित प्राणप्रतिष्ठा समारोह है. विश्व हिन्दू परिषद ने विगत तीन दशकों में अनेक क्रिमिनल और बलात्कारी राजनीतिक बाबा पैदा किये थे जो इस क्षेत्र में कार्यरत हैं. यह परम्परा के आचार्यों, गुरुओं और साधु महामाओं को हिंदुत्व के नाम पर मूर्ख बना कर अपना राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध कर चुके हैं. राम मन्दिर पर इनका कब्जा इसका प्रमाण है. भारत की सबसे पुरानी पार्टी ने धर्म क्षेत्र में इस तरह कभी दखल नहीं दिया. पी बी नरसिंह राव ने मन्दिर ट्रस्ट बनाने का उतरदायित्व धर्म गुरुओ दिया जबकि भाजपा ने स्वयं ट्रस्ट बनाकर आरएसएस-विहिप के लोगो को ट्रस्ट पर कब्जा दे दिया जिस कारण नये मन्दिर पर राजनीतिक पार्टी का अधिकार हो गया है.
शास्त्रों और धर्म की निर्धारित मर्यादा का अतिक्रमण कर धर्म के राजनितिक मानदंड स्थापित करना आचार्यों और धर्म गुरुओं को स्वीकार्य नहीं है. इस बीच सबसे बड़े अखाड़ों में एक निर्वाणी अखाड़ा के महंथ ने श्री धर्मदास जी ने स्पष्ट कहा है कि “राम जन्मभूमि मन्दिर में नई मूर्ति की स्थापना नही हो सकती, जो स्वयंभू रामलला विराजमान विग्रह पूजित है वही स्थापित हो सकता है. उन्होंने कहा है कि यदि नई मूर्ति स्थापित करेंगे तो जेल भेजवा दूंगा. मुकदमा राम लला विराजमान ने जीता है. मन्दिर उनका है. “
आप को बता दें कि निर्वाणी अखाड़े का मुख्य केंद्र है हनुमानगढ़ी है जो अयोध्या में स्थित है. यह एक शक्तिशाली अखाड़ा है. निर्वाणी आणि अखाड़े में निर्वाणी अखाड़ा, खाकी अखाड़ा, हरिव्यासी अखाड़ा, संतोषी अखाड़ा, निरावलंबी अखाड़ा, हरिव्यासी निरावलबी अखाड़ा शामिल हैं. निर्वाणी आणि अखाड़े की बैठक वृंदावन और चित्रकूट में भी है. इस अखाड़े के श्रीमहंत का चुनाव 12 वर्ष पर होता है. अयोध्या के प्रसिद्ध हनुमान गढ़ी पर इसी अखाड़े का अधिकार है.

