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सनातन धर्म में उल्लू लक्ष्मी का वाहन बताया जाता है. उल्लू एक तांत्रिक पक्षी है और बहुत रहस्यमय माना जाता है. पश्चिम में भी उल्लू बहुत महत्वपूर्ण पक्षी है विशेष रूप से वहां के ईसाई तांत्रिकों के लिए यह सिद्धिदायक है. इसके इतर विचक्राफ्ट में भी उल्लू का प्रयोग अनादि काल से होता आ रहा है. उल्लू का सभी तंत्रों में विशेष प्रयोग मिलता है. हिन्दू तंत्रों में कुछ अद्भुत प्रयोग हैं जिन्हें करने से सर्वसिद्धि मिलती है. लेकिन ज्यादा आम जन द्वारा किया जाना कमोवेश असम्भव है.

पक्षी तंत्र के अनुसार उल्लू धन का संकेत देने वाला सबसे महत्वपूर्ण पक्षी है. यदि आप कभी ऐसे स्थान पर पहुँच जाते हैं जहाँ पर किसी उल्लू का निवास हो तो उस स्थान पर दो में से एक चीज़ ही हो सकती है –
या तो वहां कहीं पर कोई खज़ाना गड़ा मिल सकता है या फिर वह जगह जल्द ही सुनसान होने वाली है और वहां कोई भी निवास नहीं करेगा. जहाँ ज्यादा उल्लू रहते हैं वहां यक्षों का निवास रहता है. अगर आप उल्लू का मांस किसी को सूखा कर खिला देते हैं तो माना जाता है की वह व्यक्ति मनोदिशा से अस्थिर हो जाता है. उल्लू की रीढ़ की हड्डी को केसर, कुमकुम और कस्तूरी से मिला कर घिस लें और इस मिश्रण का तिलक उसको लगा दें जिसको आप वशीभूत करना चाहते है, वह तुरंत वशीभूत हो जाता है.

यहाँ उल्लू से धन प्राप्ति के तीन उपाय बताये जा रहे हैं –

1- आप घर में धन की वृद्धि चाहतें हैं तो उल्लू की तस्वीर अष्टमी, अमावस्या या दशमी को ले आयें और अपनी तिजोरी में रख लें, रोज धूप दिखाएँ तो धन का आगमन होने लगेगा.

2- किसी कृष्ण पक्ष की अष्टमी, अमावस्या या दशमी को सफेद उल्लू के 7 पंख ले आयें और उसे नैऋत्य कोण में एक छोटी तिजोरी में स्थापित करें और ॐ श्री महालक्षम्यै नम: से पूजा करें और इसका 1000 जप करके तिजोरी बंद कर दे. धन अज्ञात ठिकाने से आने लगेगा .

3-कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन ब्रह्ममुहूर्त के समय काले उल्लू के पेट के पंखों को ले आए और फिर उनकी विधिवत पूजा अर्चना करें पूजा करने के बाद उन पंखों को चांदी या सोने ताबीज में बंद करके हाथ में बांध ले. इससे काम धंधे में उन्नति होगी और हर जगह सफलता मिलेगी.

नोट – इस क्रिया में उल्लू की हत्या न करें . किसी द्वारा पाले गये उल्लू से या जहाँ उल्लुओं का निवास हो वहां से पालें अथवा उल्लू पकड़ कर पंख प्राप्त कर उसे छोड़ दे.