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माघ महीने में गंगा यमुना सरस्वती के तट पर कल्पवास का विशेष महत्त्व है. माघ महीने के दौरान संगम के तट पर निवास को कल्पवास कहते हैं. कल्पवास के दौरान साधु-संत संगम तट पर रहकर प्रवचन, भजन, यज्ञ आदि कार्य करते हैं. कुछ लोग ये कल्पवास पौष शुक्ल एकादशी से आरम्भ करके माघ शुक्ल एकादशी तक जारी रखते हैं, जबकि कुछ लोग पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक कल्पवास करते हैं. माघ में गंगा स्नान, नर्मदा अर्थात वेदों में बताई गई सप्त नदियों में स्नान का बड़ा फल बताया गया है. यहाँ तक कि यदि नदी न हो तो तालाब में भी स्नान का पुण्य फल बताया गया है. स्नान-दान- जप इत्यादि इस महीनें में खूब करना चाहिए. इस पुण्यमय महीने में कृष्ण पक्ष में निम्नलिखित प्रमुख पर्व पड़ेंगे –

माघ महीने की महत्वपूर्ण तिथियाँ और पर्व –

माघ शुक्ल पक्ष की सप्तमी– सप्तमी सूर्य देव की पूजा और उपवास का दिन है. शास्त्रों के अनुसार माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी को एक भक्त, षष्ठी को नक्त और सप्तमी को उपवास करना चाहिए. सप्तमी को कनेर के पुष्पों और लाल चंदन से सूर्य भगवान की पूजा करने से सभी सुख प्राप्त होते हैं. शास्त्रों के अनुसार सप्तमी से शुरू करके पूरे एक वर्ष तक सप्तमी करते हुए सूर्यदेव की पूजा करने का विधान है. इसमें पूरे साल को चार-चार महीनों के तीन भागों में बांटकर, हर भाग में विभिन्न नैवेद्य, पुष्प और धूप से भगवान की पूजा करनी चाहिए और अंत में एक रथ का दान करना चाहिए. माघ शुक्ल पक्ष की सप्तमी पर आक की सात पत्तियां, चावल, तिल, दूर्वा, अक्षत और चन्दन लेकर जल में डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए और प्रणाम करना चाहिए, इससे समस्त कामनाएं पूरी होती हैं. इस बार माघ शुक्ल पक्ष की सप्तमी 16 फरवरी को है. 

संकष्टी चतुर्थी– माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी 29 जनवरी को पड़ रही है. इसे संकष्टी चतुर्थी, सकट चौथ या तिल चौथ के नाम से जाना जाता है. भगवान गणेश को समर्पित इस तिथि में पूजन से सभी संकट खत्म होते हैं. भगवान गणेश की उत्पत्ति भी इसी दिन हुई थी. इस माघ चतुर्थी पर भगवान गणेश की उपासना और उनके निमित्त व्रत करने से सभी संकट दूर होते हैं और सुखो की प्राप्ति होती है. संकष्टी चतुर्थी व्रत में पूरा दिन निराहार रहकर शाम के समय चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है और तिलकूट खाया जाता है. 29 जनवरी को चंद्रोदय रात 8 बजकर 48 मिनट पर होगा. इस समय पारण करके व्रत का समापन करें.

माघ कृष्णपक्ष एकादशी – माघकृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है. इस बार यह एकादशी 6 फरवरी मंगलवार को पड़ रही है. इसका विवरण एकादशी व्रत के समय अलग से दिया जाएगा.

माघ कृष्ण पक्ष की द्वादशी -माघ कृष्ण पक्ष की द्वादशी को उपवास कर तिल से हरि पूजा करने, तिल से होम करने, तिल का दान करने और उसे खाने का विधान है. मान्यता है कि माघ कृष्ण पक्ष की द्वादशी को यम ने तिल उत्पन्न किये थे, जिसे दशरथ ने पृथ्वी पर लाकर बोया था और भगवान विष्णु को देवों ने तिल का स्वामी बनाया था. माघ कृष्ण पक्ष की द्वादशी को तिल से विष्णु पूजन किया जाता है. माघ कृष्ण पक्ष की उदया तिथि द्वादशी 7 फरवरी को पड़ रही है। 

माघ अमावस्या-इस बार माघ अमावस्या 9 फरवरी को पड़ रही है. माघ अमावस्या को मौनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है. इसके अलावा माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विद्या की देवी सरस्वती की पूजा का विधान है। इस दिन घरों में पीले चावल बनाये जाते हैं. बसंत पंचमी के दिन ही रतिकाम महोत्सव भी मनाया जाता है. इस दिन भगवान कामदेव और उनकी पत्नी भगवति रति की पूजा करने का विधान है.

माघ गुप्त नवरात्रि – हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष के प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि का शुरुआत होती है और नवमी तिथि तक मनाई जाती है. इस साल 10 फरवरी 2014 से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है और 18 फरवरी 2024 को इसकी समाप्ति होगी.