हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के अगले दिन पूर्णिमा मनाई जाती है. इस बार पौष पूर्णिमा 25 जनवरी को पड़ रही है. यह पूर्णिमा पुष्य नक्षत्र में पड़ती है इसलिए यह शिव पूजा के लिए अति लाभप्रद मानी गई है. इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-व्रत करने का भी विधान है. पौष पूर्णिमा पर पुष्य स्नान, जप-तप और दान-पुण्य करने का बहुत महात्म्य है. वैष्णव मान्यता के अनुसार, पूर्णिमा के दिन जगत के भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है और साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.
शैव धर्म में भगवान शिव और पार्वती का पूजन करने का महात्म्य है. इस पूर्णिमा में शिव पूजा विशेष फलप्रद मानी गई है. इसमें शिवा मां शाकम्भरी की पूजा करने से सभी सुखों की प्राप्ति होती है, घर में धन धन्य की कभी कमी नहीं होती. मां शाकम्भरी का शिव सहित पूजन करना चाहिए और सभी प्रकार के अन्न का भोग लगाना चाहिए. दुर्गाशप्तशती के अनुसार इस दिन मां शाकम्भरी का प्राकाट्य हुआ था इसलिए पुष्य पूर्णिमा को शाकम्भरी जयंती मनाया जाता है. दुर्गा शप्तशती के इन दो श्लोकों में देवी के प्राकट्य का वर्णन किया गया है –
ततोऽहमखिलं लोकमात्मदेहसमुद्भवैः ।
भरिष्यामि सुराः शाकैरावृष्टेः प्राणधारकैः ॥ ४८॥
शाकम्भरीति विख्यातिं तदा यास्याम्यहं भुवि ।
तत्रैव च वधिष्यामि दुर्गमाख्यं महासुरम् ॥ ४९॥
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय पृथ्वी पर दुर्गम नामक दैत्य ने आतंक का माहौल पैदा किया था. इस दैत्य के आतंक से जनता दुखी थी और अकाल में करीब सौ वर्ष तक वर्षा न होने के कारण अन्न-जल के अभाव में लोग मर रहे थे. जीवन खत्म हो रहा था.उस दैत्य ने ब्रह्माजी से चारों वेद चुरा लिए थे. तब आदिशक्ति मां दुर्गा अन्न, शाक इत्यादि में मां शाकंभरी देवी के रूप में अवतरित हुई, जिनके सौ नेत्र थे. मां शाकंभरी ने दुर्गम दैत्य का अंत कर प्राणियों के प्राण की रक्षा किया था. मां शाकम्भरी का भव्य मन्दिर सहारनपुर में स्थित है.
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में रहने वाली जनजातियाँ पौष माह के पूर्णिमा के दिन छेरता पर्व बडे़ धूमधाम से मनाती हैं. सभी के घरों में नये चावल का चिवड़ा गुड़ तथा तिली के व्यंजन बनाकर खाया जाता है.
पौष पूर्णिमा मुहूर्त –
पौष पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 24 जनवरी को देर रात्रि 09 बजकर 49 मिनट पर होगी और इसके अगले दिन यानी 25 जनवरी को देर रात्रि 11 बजकर 23 मिनट पर तिथि का समापन होगा। इस बार 25 जनवरी, गुरुवार के दिन पूर्णिमा मनाई जाएगी. देवी का रात्रि 8:18 से 9: 36 तक में पूजन प्रशस्त है. इस समय देवी का विधिवत पुजन कर सकते हैं

