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महाभारत में कृष्ण का चरित्र अत्यंत बहुआयामी है: वे एक दिव्य मार्गदर्शक (गुरु), कुशल रणनीतिकार, रक्षक, राजनीतिक सुधारक और धर्म के संरक्षक हैं, जो अर्जुन को भगवद्गीता के माध्यम से कर्तव्य, धर्म और कर्म का सार समझाते हैं, साथ ही पांडवों के लिए हर संकट में खड़े रहते हैं और अंततः अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना करते हैं. यहाँ उनके असली स्वरूप का जिक्र किया गया है.